आखिरकार क्यों दफ्तर दफ्तर भटक रहे हैं स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के पदाधिकारी.......[स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ प्रदेशाध्यक्ष के द्वारा शिक्षा मंत्री से मुलाकात करते हुए]......

 आखिरकार क्यों दफ्तर दफ्तर भटक रहे हैं स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के पदाधिकारी





 [स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ प्रदेशाध्यक्ष के द्वारा शिक्षा मंत्री से मुलाकात करते हुए]



छत्तीसगढ़ राज्य में जब 17 दिसंबर 2018 को  श्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रुप में जब पदभार ग्रहण किया  तो इन  स्कूल सफाई कर्मचारियों की उम्मीद कुछ ज्यादा ही बढ़ गई इन कर्मचारियों को लगने लगा था कि अब कहीं ना कहीं उनके जो मांग जायज हैं वह पूरा हो पाएंगे जिनसे इन कर्मचारियों के परिवार के सदस्य का भरण पोषण ठीक ठाक  हो पाएगा लेकिन  इन कर्मचारियों   क्या पता था कि इनके  सुध लेने वाला कोई नहीं होगा यह कर्मचारी प्रदेश सरकार की ऐसा कोई विधायक ,मंत्री और उच्च अधिकारी नहीं होगा जिनके दरवाजे पर जाकर अपनी मांगों को नहीं रखा होगा और मंत्री विधायकों ने केवल और केवल इन कर्मचारियों को आश्वासन  के सिवाय आज तक कुछ नहीं  दिया है कि मांग पूरा करवाएंगे बहुत जल्द पूरा करवाएंगे ऐसे करते-करते आज वर्तमान सरकार के लगभग  3 वर्ष 1 महीने 27 दिन बाद भी  इन कर्मचारियों के आर्थिक हालात  में कोई सुधार होना तो दूर की बात है इन कर्मचारियों की मांग सुनने वाला भी अभी तक कोई नहीं है जब 2 अक्टूबर 2021 को प्रदेश की लगभग 45000  स्कूल सफाई कर्मचारी रैली के माध्यम से आंदोलन करने के लिए 5 अक्टूबर को जब रायपुर पहुंचा तो राज्य सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा 3 सदस्य कमेटी का गठन कर 15 दिवस में कर्मचारी संगठनों से बैठक करने का आदेश जारी किया था लेकिन कुछ दिन बीत जाने के बाद भी  एक और आदेश जारी हुआ जिसमें 16 नवंबर को 3 सदस्य कमेटी के साथ उक्त कर्मचारियों की बैठक होना निर्धारित हुआ उस बैठक में कर्मचारी के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए और अपने जो भी समस्या हैं उनको राज्य सरकार को बताया | और यह समस्या कोई अभी का नहीं है लगभग 11 वर्ष  होने वाला है इन कर्मचारियों को  राज्य सरकार चाहे पूर्व हो या वर्तमान शासन को बताते चला आ रहा है कि हम कर्मचारी किन मजबूरी में जीवन जी रहे हैं और अपने परिवार का भरण पोषण भी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं और आर्थिक तंगी में जीवन जीने को मजबूर है  वर्तमान सरकार ने भी इन कर्मचारियों को अपने 3 वर्षों से भी ऊपर के समय में केवल आश्वासन के सिवाय आज तक कुछ नहीं दे पाया है जिनसे इन कर्मचारियों की  मन में आक्रोश भी बहुत ज्यादा है और हालत देखने लायक है और ना ही यह कर्मचारी अपनी मूलभूत  जरूरत की चीजों का पूर्ति कर पा रहे हैं और ना ही समस्याओं के समाधान के लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं आपको बता दें कि इन कर्मचारियों को स्कूल शिक्षा विभाग में कार्य करते हुए लगभग 11 वर्षों होने वाला है लेकिन यह कर्मचारी कई बार प्रदेश की राजधानी में कई कई दिनों तक आंदोलन की हैं लेकिन इन कर्मचारियों की मांग को सुनने वाला आज तक कोई नहीं हुआ है यह लोग अपनी समस्याओं को प्रदेश के मंत्री विधायकों और सांसदों  प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी कई बार मुलाकात करके अपनी समस्याओं को बता चुके हैं उसके बाद भी आज तक इन कर्मचारियों के जो मांग पूर्ण कालीन सहित नियमितीकरण का है वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है अगर राज्य सरकार इन कर्मचारियों का मांग पूरा करता है तो यह कर्मचारी अपने परिवार का भरण पोषण तो सही ढंग से कर पाएंगे और इन कर्मचारियों का मांग ही इतना है कि अपने परिवार की वर्तमान हालत को देखा जाए तो ना तो अपने बच्चों को शिक्षा ठीक से दे पा रहे हैं यह कर्मचारी , और ना ही अन्य  अपनी जरूरत की चीजों की पूर्ति कर पा रहे हैं | हालात इन कर्मचारियों का ऐसा है कि किसी का परिवार के सदस्य कि तबियत खराब हो जाए तो उनका भी इलाज कर पाना इन कर्मचारियों के हाथों में संभव नहीं है आपको बता दें कि  आजादी के 75 वर्ष बाद भी यह कर्मचारी कम मानदेय पर ही काम करने को मजबूर है और ना अपने संसाधन की पूर्ति कर पा रहे हैं और ना ही अपने परिवार के सदस्य की शिक्षा स्वास्थ्य और भरण पोषण का भी पूर्ति नहीं कर पा रहे इन कर्मचारियों की स्थिति को देखा जाए तो बद से बदतर स्थिति में जीवन जीने को मजबूर हैं



आखिर क्यों नहीं सुन रहे हैं इन कर्मचारियों की मांग -


आपको बता दें कि लगभग इन कर्मचारियों को 11 वर्ष स्कूल शिक्षा विभाग में काम करते हुए हो गया है लेकिन इन कर्मचारियों का मांग  को सुनने वाला कोई नहीं है केवल और केवल 11 वर्षों में आश्वासन ही मिल रहा है इन कर्मचारियों को और मांग केवल इतना है कि जिनसे इन कर्मचारी अपने परिवार का सही तरीके से भरण-पोषण कर सके और समाज में रहकर एक अच्छी जिंदगी जी सकें लेकिन 11 वर्षों के बाद भी इन कर्मचारियों को आश्वासन के सिवाय आज तक कुछ नहीं मिला है क्योंकि पूर्व सरकार में भी यह कर्मचारी कई बार आंदोलन किए हैं लेकिन सुनने वाला इनका कोई नहीं था और जो मंत्री विधायक इन कर्मचारियों की मांग को सुनता था वह केवल आश्वासन देकर छोड़ देते थे वैसे करते करते पूर्व सरकार सत्ता से चली गयी और वर्तमान कांग्रेस सरकार के भी लगभग 3 वर्षों से भी ज्यादा का समय होने वाला है उसके बाद भी यह कर्मचारी केवल ऑफिस ऑफिस ही भटक रहे हैं और अपने समस्याओं को बता रहे हैं कि हम कर्मचारी किन हालातों में जीवन जीने को मजबूर हैं हमें भी तो सुना जाए और हमारे भी मांग पूरा की जाए लेकिन आज पर्यंत तक इन कर्मचारियों की मांग सुनता तो जरूर है लेकिन आश्वासन देकर छोड़ दे रहे हैं कि बहुत जल्द आप लोगों की मांग पूरा करेंगे ऐसे करते करते वर्तमान सरकार के 3 वर्ष से भी ज्यादा का समय गुजर गया है और इन कर्मचारियों की जो मांग है वह जस की तस है|


अब देखना यह है कि जो राज्य सरकार के विभाग द्वारा तीन सदस्य कमेटी इन स्कूल सफाई कर्मचारियों की मांगों के संबंध में बनाई गई है वह लगभग 3 महीने होने के बाद भी अब तक  मांग के संबंध कुछ  पता नहीं चल रहा है अब आने वाला समय में 3 सदस्य कमेटी क्या इन कर्मचारियों की मांगों को पूरा कर पाते हैं या फिर आश्वासन देकर इन कर्मचारियों की जीवन के साथ ऐसे ही खिलवाड़ करते चले जाएंगे अभी आने वाला समय ही बताएगा कि इन कर्मचारियों का मांग पूरा हो पाता है या नहीं आने वाले समय में बजट सत्र भी होने वाला है जिसमें इन कर्मचारियों की निगाहें टिकी हुई है

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